योजनाओं का विवरण


मथुरा एवं वृन्दावन नगर एवं उससे लगे क्षेत्र की बढ़ती आबादी एवं शहरी समस्या को ध्यान में रखते हुये विकास प्राधिकरण द्वारा समय समय पर विभिन्न आवासीय व्यावसायिक योजनायें प्रारम्भ की गई जिनका विवरण निम्न प्रकार हैः-


1. महाविद्या आवासीय योजना (प्रथम चरण):-


मथुरा नगर की आवासीय समस्या के निदान हेतु श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं महाविद्या मंदिर के मध्य नगर पालिका मथुरा की 13.09 एकड़ नजूल भूमि पर विकास प्राधिकरण द्वारा महाविद्या आवासीय योजना प्रथम चरण का निर्माण एवं विकास कार्य कराया गया । यह भूमि नगरपालिका से दि0 13.2.80 को 90 वर्ष के पट्टे पर इस योजना हेतु ली गई थी। योजना में विभिन्न प्रकार के आवासीय भवन एवं भूखण्डों का निर्माण कराया गया जिसमें सभी मूलभूत सुविधायें जैसे:- मीठा पेयजल, सीवर, सड़क, विद्युत एवं पार्को की व्यवस्था की गई है ।


योजना में मध्यम वर्ग के 70 भवन, अल्प आय वर्ग के 60 भवन, दुर्बल आय वर्ग के 67 भवन तथा आवासीय 34 भूखण्ड, व्यावसायिक एक भूखण्ड तथा आठ दुकानों का निर्माण किया गया था । योजना में सभी उक्त भूखण्डों का आवंटन कर कब्जा दिया जा चुका है । भारतीय संस्कृति परिषद को आवंटित एक भूखण्ड पर विवाद मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पटियाला हाऊस नई दिल्ली के न्यायालय में लम्बित है, जिसके निस्तारण हेतु विधिक परामर्श प्राप्त कर कार्यवाही की जा रही है तथा आवंटी की जमा धनराशि की वापसी कर दी गयी है। योजना में सभी उक्त भवन/भूखण्डो का आवंटन किया जा चुका है। योजना नगर पालिका परिषद मथुरा को हस्तान्तरित की जा चुकी है। जिलाधिकारी मथुरा द्वारा भूमि के फ्रीहोल्ड कराने के सम्बन्ध में निर्णय लिया जा चुका है। फ्रीहोल्ड धनराशि जिलाधिकारी मथुरा कार्यालय को किस्तों में दी जा रही है।


2. कदम्ब विहार आवासीय योजना (रांची बांगर):-


मथुरा तेल शोधक कारखाने की स्थापना से बढ़ते हुये कर्मचारियों/अधिकारियों की आवासीय समस्या को ध्यान में रखते हुये रिफाइनरी टाउनशिप के सामने आगरा दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर दि0 17-8-82 को 22.75 एकड़ भूमि अधिग्रहीत कर योजना का निर्माण एवं विकास कार्य कराया गया । यह प्राधिकरण की दूसरी योजना थी । योजना में विभिन्न श्रेणी के भवन/भूखण्डों का निर्माण/विकास कार्य कराया गया है । योजना में मध्यम आय वर्ग के 30 भवन अल्प आय वर्ग के 116 भवन तथा दुर्बल आय वर्ग द्विमंजिले 672 भवनों एवं 151 भूखण्डों का निर्माण कराया गया है । योजना में सभी मूलभूत सुविधायें उपलब्ध कराई गयी हैं। सभी भवन/भूखण्ड आवन्टित किये जा चुके है और आवन्टी निवास कर रहे है ।


3. महाविद्या आवासीय योजना (द्वितीय चरण):-


श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पीछे विकसित महाविद्या आवासीय योजना प्रथम चरण से मांग पूर्ति न होने के कारण विकास प्राधिकरण द्वारा प्रथम चरण से लगी हुई नगरपालिका मथुरा की 14.53 एकड़ नजूल भूमि को 90 साल के पट्टे पर लेकर महाविद्या आवासीय योजना (द्वितीय चरण) के नाम से योजना दि0 9.1.87 से प्रारम्भ की गई । योजना में विभिन्न श्रेणी के भवन/भूखण्डों का निर्माण एवं विकास कराया गया जिनको आवंटित कर कब्जा वर्ष 1989 में ही दिया जा चुका है । वर्ष 1995-96 में योजना की भूमि की पुनः नाप कराई गयी जिसमें खाली पड़ी भूमि पर सर्वे कराकर निर्माण एवं विकास की योजना तैयार की गई जिसमें 195 अल्प आय एवं 171 मध्यम आय वर्ग के भवन तथा 131 भूखण्डों का निर्माण कराया गया जो आवेदकों को आवंटित किये जा चुके हैं । योजना में सभी मूलभूत सुविधिायें उपलब्ध है तथा पूर्णरूप से विकसित है तथा नगरपालिका परिषद मथुरा को हस्तान्तरित की जा चुकी है। जिलाधिकारी मथुरा द्वारा भूमि के सम्बन्ध में निर्णयक किया जा चुका है । फ्रीहोल्ड धनराशि जिलाधिकारी मथुरा कार्यालय को किस्तों में दी जा रही है ।


4. कैलाश नगर आवासीय योजना:-


वृन्दावन धाम में देश के अन्य भागों से धार्मिक कार्यों के लिये आने वाले लोगों को आवासीय समस्या एवं नगर की बढ़ती हुई आबादी के कारण आवासीय समस्या के निदान हेतु प्राधिकरण द्वारा अटल्ला चुंगी के पास परिक्रमा मार्ग से लगी हुई 32.16 एकड़ भूमि का कब्जा दि0 2.3.90 एवं 7.2.91 में लेकर योजना का निर्माण एवं विकास किया गया । योजना में समस्त आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध कराते हुये उच्च वर्ग के 55, मध्यम आय वर्ग 141, अल्प आय वर्ग 210, दुर्बल आय वर्ग के 252 भवन एवं 205 आवासीय भूखण्डों का निर्माण किया गया है। योजना के सभी भवन/भूखण्ड आवन्टित किये जा चुके हैं और आवन्टी निवास कर रहे हैं । योजना में 10 दुकानों का निर्माण कराया गया है जो अभी तक निस्तारित नहीं की जा सकी है ।


5. चैतन्य विहार आवासीय योजना (प्रथम चरण):-


वृन्दावन धाम में आवासीय मांग के निदान हेतु वृन्दावन छंटीकरा मार्ग पर इस्काॅन मंदिर के पास रमनरेती क्षेत्र में भूमि पर कब्जा प्राप्त कर योजना बनाई गयी तथा पंजीकरण कराये गये किन्तु वर्ष 91 से 94 तक योजना पर कार्य न होने के फलस्वरूप योजना पर पुनः विचार किया गया तथा एक आदर्श योजना के रूप में विकसित करने एवं स्ववित्त पोषित पद्धति पर विकसित करने का निर्णय लिया गया था। योजना में उच्च आय वर्ग 247 भूखण्ड, मध्यम आय वर्ग के 120 भूखण्ड, अल्प आय वर्ग के 43 तथा गु्रप हाउसिंग के 2 भूखण्डों का विकास किया गया है, जिनमें से सभी का आवंटन हो चुका है । स्थल पर विकास कार्य पूर्ण हो चुका है आवंटी निर्माण कराकर रह रहे हैं ।


6. विकास बाजार (व्यावसायिक काॅम्पलैक्स):-


शहरी आवास समस्या के साथ-साथ व्यवसायिक समस्या के निराकरण हेतु प्राधिकरण द्वारा शहर के मध्यम विक्टोरिया पार्क में नगर पालिका मथुरा से प्रथम चरण में द्विमंजिले 198 दुकानों का निर्माण कराया गया जो सभी आवंटित कर आवंटियों को दी जा चुकी है तथा वे अपना व्यवसाय कर रहें है । द्वितीय चरण में 0.48 एकड़ भूमि क्रय कर विकास बाजार विस्तार का निर्माण कराया गया जिसमें 82 द्विमंजिली दुकानों का निर्माण कराया गया । इन दुकानों में से 82 दुकानों का आवंटन किया जा चुका है । विकास बाजार मथुरा नगर का एक प्रमुख व्यावसायिक केन्द्र बन गया है जिसमें पार्किंग, प्रकाश आदि की उचित व्यवस्था उपलब्ध है।


7. सुदामापुरी (नवादा) आवासीय योजना:-


बीस सूत्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत दुर्बल आय वर्ग के लोगों की आवासीय समस्या के निदान के लिए नवादा गाॅंव सभा की 1.291 है0 भूमि पर दिनांक 22.2.90 को योजना का निर्माण कराया गया जिसमें दुर्बल आय वर्ग 154 भवन, आवासीय 23 भूखण्ड तथा व्यावसायिक 2 भूखण्ड बनाये गये । योजना के समस्त भवन/भूखण्डों का आवंटन किया जा चुका है ।


8. राधापुरम आवासीय योजना:-


यह योजना कुल 27.97 एकड़ भमि पर प्रस्तावित है जिसमें ग्राम जयसिंहपुरा बांगर की 15.58 एकड़ भूमि का कब्जा दि0 3.4.92 को तथा अहिल्या गंज की 12.39 एकड़ भूमि का कब्जा दि0 26.4.97 को मा0 उच्च न्यायालय से रिट खारिज होने के उपरान्त लिया गया है। योजना में दूरभाष विभाग को 12085.10 वर्ग मी0 भूमि व लगभग 6000 वर्ग मी0 भूमि आकाशवाणी मथुरा को आवंटित की गयी है । विकास कार्य पूरे कराये जा चुके हैं। योजना में 25 अल्प आयवर्ग भवन एवं 244 भूखण्ड बनाये गये हैं। जिनमें से 25 अल्प आयवर्ग भवन एवं 244 भूखण्डों का आवंटन किया जा चुका है । योजना में 10 उच्च आय वर्ग के भवन बनाये गये थे, जिनको आंवटित किया जा चुका है । राधापुरम आवासीय योजना विस्तार की 6.12 एकड़ भूमि विवाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय में वाद था जो प्राधिकरण के पक्ष में निर्णय हो चुका है । इस योजना में विकास कार्य अधिकतर पूर्ण हो चुके हैं । इस योजना में कुल 58 आवासीय भूखण्ड, 3 गु्रप हाउसिंग भूखण्ड व 1 व्यावसयिक भूखण्ड है, गु्रप हाउसिंग में तीनों भूखण्ड नीलामी हो चुकी थी । जिनमें से 2 भूखण्डों के आवंटियों द्वारा धनराशि वापस ली जा चुकी है एवं पुनः दोनों भूखण्डों की नीलामी के माध्यम से विक्रय किया जा चुका है । तीसरे भूखण्ड का वाद माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है । व्यवसायिक भूखण्ड एवं आवासीय भूखण्डों का भी क्रमशः नीलामी एवं लाटरी ड्रा द्वारा आवंटन किया जा चुका है ।


9. कृष्णापुरम आवासीय योजना:-


मथुरा वृन्दावन रोड पर बिड़ला मन्दिर के पास जयसिंहपुरा बांगर की 17.79 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर दि0 24.3.92 को कब्जा लिया गया । भू-स्वामियों द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में रिट याचिका सं0 2651/92, 10579/92 एवं 39907/92 दायर कर निर्माण एवं विकास पर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है । स्थगन आदेश निरस्त हो जाने के फलस्वरूप कार्य प्रारम्भ कर दियं गये है इस योजना में उच्च आयवर्ग के 179 भूखण्ड, मध्यम आय वर्ग के 48 भूखण्ड तथा अन्य आय वर्ग के 41 भूखण्ड बनाये गये थे जिन सभी का आवंटन किया जा चुका है । स्थल पर सड़क, पार्क, विद्युतीकरण का कार्य कराया जा चुका है । भूखण्डों की रजिस्ट्री कर कब्जा दिया जा रहा है तथा योजना नगर पालिका परिषद, मथुरा को हस्तान्तरित की जा चुकी है।


10. चैतन्य बिहार योजना (द्वितीय चरण):-


चैतन्य बिहार आवासीय योजना द्वितीय चरण वृन्दावन रेलवे लाइन से सटी हुई महायोजना मार्ग व चैतन्य बिहार योजना प्रथम चरण के निकट है । योजना के क्रियान्वयन हेतु बाॅंगर में 112.50 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर दि0 30.3.94 को कब्जा लिया गया । योजना के भू-विन्यास तैयार कर विकास कार्यो पर रु0 1936.00 लाख के तैयार कर विस्तृत विवरण प्राधिकरण बोर्ड के समक्ष रखा गया था जिसे अनुमोदित किया गया । स्थल पर विकास कार्य पूर्ण कराये जा चुके हैं ।


इस योजना में विभिन्न श्रेणियों के अधिकांश भूखण्डों का आवंटन किया जा चुका है , विकास कार्य सैक्टर 2,3,4 में तक पूर्ण हो चुके है शेष सैक्टर 1,5 में भी विकास कार्य पूर्ण कराये जा चुके हैं । सैक्टर 2,3,4 में कुल 1204 भूखण्ड विकसित किये जाने थे जिनमें से 1203 भूखण्ड आवन्टित कर रजिस्ट्री कराकर कब्जा दिया जा रहा है । साथ ही सेक्टर 5 का भी विकास कार्य हो चुका है, जिसपर 242 निर्मित भूखण्डों के आवंटन किये जा चुके हैं । एक भूखण्ड सामुदायिक सुविधाओं के लिये आरक्षित है ।


11. यातायात नगर योजना:-


दिल्ली-आगरा मुख्य मार्ग पर मण्डी समिति के पास यातायात नगर योजना क्रियान्वित की जा रही है । 8.433 है0 भूमि ग्राम पालीखेड़ा को अधिग्रहीत की गयी थी जिसमें मा0 उच्च न्यायालय से रिट पिटीशन निस्तारित होने के उपरान्त 12.97 को 7.227 है0 भूमि का भौतिक कब्जा लिया गया , तथा पूर्व में दिनांक 28.12.94 को 1.206 है0 का कब्जा प्राप्त किया गया था । योजना का ले-आउट दि0 4.2.98 को स्वीकृत कराकर समय समय पर पंजीकरण खोले गये जिसमें कुल निर्मित 702 विभिन्न प्रकार के भूखण्डों में से 700 का आवन्टन किये जा चुके हैं तथा रजिस्ट्री कर कब्जा दिया जा रहा है । एक भूखण्ड सम्भागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय तथा एक भूखण्ड गोदाम के आवंटन हेतु शेष है। योजना में विकास कार्य पूर्ण करा दिया गया हैं। स्थल पर सड़क, विद्युतीकरण, नाला, नालियाॅं, ओवरहैड टैंक का कार्य पूर्ण हो चुका है । रजिस्ट्री एवं कब्जा देने का कार्य प्रगति पर है ।


12. कार्यालय काॅम्लैक्स:-


कार्यालय काॅम्पलैक्स 32 सिविल लाइन्स क्षेत्र 3161.85 वर्ग मी0 भूमि में स्थित है जिसे प्राइवेट व्यक्तियों से बैनामा करा कर क्रय की गयी थी । प्राधिकरण कार्यालय पूर्व में सिविल लाइन्स स्थित किराये के भवन में था और कार्यालय भवन की आवश्यकता को महसूस करते हुए उक्त भूमि लेकर अपने निजी श्रोतांे से भवन का निर्माण करवाया गया । इस भवन में प्राधिकरण कार्यालय के अतिरिक्त भारतीय स्टेट बैंक कैंट शाखा, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, जिला कमाण्डेन्ट होमगाडर््स, व्यापार कर अधिकारी कार्यालय, दूरसंचार विभाग, सहायक आयुक्त निबन्धन एवं जिला रोजगार कार्यालय किराये पर है ।


13. कृष्णा विहार (राॅंची बांगर योजना ):-


योजना हेतु ग्राम राॅंची बांगर की 10.389 है0 तथा आजमपुर की 14.472 है0 भूमि अधिग्रहीत कर कब्जा क्रमशः दि0 04.02.1999 एवं 11.02.2000 को लिया जा चुका है । योजना में भूखण्डों का पंजीकरण कराया गया है तथा विभिन्न प्रकार के 567 भूखण्डों का लाटरी पद्धति से आवंटन किया जा चुका है । योजना के आजमपुर की 9.524 है0 भूमि पर मा0 उच्च न्यायालय में वाद लम्बित होने के कारण योजना के विकास कार्य करने में प्रगति नहीं हो पाई है । कृष्ण विहार योजना के राॅंची बांगर की भूमि में शासन द्वारा निर्धारित दुर्बल आय वर्ग के 20 भूखण्ड एवं 40 भवन एवं अल्प आय वर्ग के 38 भवनों का निर्माण पूर्ण कर आवन्टन किया जा चुका है


14. रूक्मणी विहार आवासीय योजना, वृन्दावन:-


राष्ट्रीय राजमार्ग-2 से वृन्दावन को जाने वाले छटीकरा मार्ग पर कुल 183 एकड़ भूमि पर इस योजना का निर्माण कार्य वर्ष 2009-10 में प्रारम्भ किया गया है । इस योजना को कुशल नियोजक द्वारा आधुनिक जन आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए एवं बृज क्षेत्र के सौन्दर्याीकरण एवं महायोजना की आवश्यकताओं को पूर्ण करते हुए एक अत्यन्त कुशल नियोजक से नियोजित कराया गया है । इस योजना में कुल 653 आवासीय भूखण्ड रखे गये हैं जिनमें लगभग 500 वर्ग मी0 के 74 भूखण्ड, 300 वर्ग मी0 90 भूखण्ड, 200/204/260 वर्ग मी0 के 149 भूखण्ड, 150 वर्ग मी0 116 भूख्ण्ड, 98/100 वर्ग मी0 के 100 भूखण्ड एवं 50 वर्ग मी0 के 124 भूखण्ड रखे गये हैं । 01 कार्मशियल भूखण्ड, 02 नर्सिंग होम भूखण्ड, 01 इण्टर कालेज भूखण्ड, 01 कन्विनेंन्ट शापिंग भूखण्ड, 08 ग्रुप हाउसिंग भूखण्ड, 02 होटल भूखण्ड एक पार्किंग, साईट आॅफिस/गैस्ट हाऊस भूखण्ड के अतिरिक्त 672 दुर्बल आय वर्ग के भवन, 656 निम्न आय वर्ग के भवनों, 272 स्टूडियो टाइप तथा 608 1बी0एच0के0 का सृजन कर निर्माण कार्य किया जा रहा है । 135 आश्रम मठ भूखण्ड रखे गये हैं जिनमें 500 वर्ग मी0 से 4192.25 वर्ग मी0 के भूखण्ड रखे गये हैं। आश्रम मठ के यह सभी भूखण्ड योजना के प्रारम्भ में छटीकरा रोड़ पर सृजित किये गये हैं अधिकांश रुप से 500 वर्गमी0 जिन पर भवन निर्माण का कार्य शासन/महायोजना के अनुसारा निर्धारित वास्तुकला पर आधारित होगा । योजना के प्रारम्भ में कुशल नियोजित एक बाउण्ड्रीवाल एवं मुख्य द्वारों का निर्माण कार्य कराया जाना प्रस्तावित है । इस योजना में बृहद क्षेत्रफल ग्रीन बैल्ट एवं पार्कों हेतु रखा गया है । योजना के 30 मी0 चैड़े मुख्य मार्ग के दोनों तरफ 15-15 मी0 चौड़ी ग्रीन बैल्ट प्राविधानित है । योजना हेतु तीन 33/11 के0वी0 विद्युत उपकेन्द्र एक 132 के0वी0ए0 विद्युत केन्द्र स्थापित कराया जा रहा है । योजना में ही सीवेज पम्पिंग स्टेशन के निर्माण हेतु उ0प्र0 जल निगम को जमीन दी गई है जिस पर उनके द्वारा एस0पी0एस0 के निर्माण का कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है । योजना में जन सुविधाओं/सामुदायिक सुविधाओं हेतु भूमि आरक्षित की गई है । इस योजना को पूर्णतः विकसित करने का लक्ष्य वर्ष 2015-16 तक रखा गया है ।